IDFC बैंक में 590 करोड़ रुपये का घोटाला: कैश आधारित लेन‑देन ने दिया मौका, नोट खारेजी से रोकथाम संभव

हरियाणा के चंडीगढ़ स्थित IDFC First Bank की एक शाखा में लगभग 590 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले की जांच सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही है, जिसमें सरकारी खातों से अवैध धन निकाले जाने के आरोप हैं। यह मामला उस समय सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपने खाते को बंद कर दूसरे बैंक में पैसा ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, लेकिन बैलेंस में भारी अंतर पाया गया, जिससे जांच शुरू हुई। आरोप है कि कुछ बैंक कर्मचारियों और बाहरी पक्षों के बीच मिलकर नकली दस्तावेजों और भौतिक चेकों के माध्यम से सरकारी निधियों को गलत तरीके से स्थानांतरित किया गया।

इस तरह के बड़े वित्तीय घोटाले का एक महत्वपूर्ण कारण अभी भी अर्थव्यवस्था में नगद और पारंपरिक भौतिक लेन‑देन का प्रभुत्व है। नकद और चेक जैसे उपकरणों के प्रयोग से लेन देन का ट्रैक रखना कठिन हो जाता है, और ऐसे में धोखाधड़ी और अनियमितता को छुपाना आसान हो जाता है। डिजिटल और ट्रेस योग्य भुगतान प्रणाली तथा कड़े नियंत्रण के अभाव ने इस तरह के भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। अगर विकसित और व्यापक डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाया गया होता, तो हर लेन‑देन का रिकॉर्ड बैंकिंग नेटवर्क के भीतर उपलब्ध होता और ऐसे बड़े पैमाने के घोटालों को रोकना संभव होता।

इसलिए नोट खारेजी और डिजिटल भुगतान जैसे उपाय अपनाने से इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है। नगद खर्च को कम करके और हर लेन‑देन को ट्रैक कर सकने योग्य बनाकर भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को घटाया जा सकता है। यह आवश्यक है कि भविष्य में इस तरह के घोटाले की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए मौजूदा और नई सरकारों को पारदर्शी और डिजिटल वित्तीय प्रणाली को अपनाने का ध्यान देना चाहिए।

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